Natural life Healthier Life / दुग्ध-चिकित्सा,

दुग्ध-चिकित्सा (दुग्ध-कल्प) 

 दुग्ध-चिकित्सा,Natural life Healthier Life

एक स्वतन्त्र चिकित्सा पद्धति ही है रोगियों को केवल दूध पिलाकर उन्हें रोगों से मुक्त किया जाता है।

अनुभवी दुग्ध-चिकित्सकों का कहना है कि हृदय से सम्बन्धित रोगों को छोड़कर कोई भी शारीरिक व्याधि ऐसी नहीं हैं जो दुग्ध चिकित्सा से न मिट सके। पर दूध का उपचार ज्वर रोग में अनुकूल नहीं पड़ सकता। कारण ज्वर में कुछ भी खाना जान को खतरे में डालना है।

कुछ दुग्ध-चिकित्सकों का यह भी अनुभव है कि दुग्ध-चिकित्सा से रोग जड़ से नहीं जाता इसलिये

पहले रसाहार, फलाहार या और अनेक कियाओं द्वारा जब रोग जड़ से चला जाये तब वजन बढ़ाने के लिये दूध का कल्प काम में लाना चाहिय। दग्ध-चिकित्सा से मानसिक रोग, संग्रहणी, प्यास, शूल,उन्माद, मच्छा भ्रम वायूगोला, वस्तिरोग, बवासीर, रक्तपित्त, अतिसार योनिरोग ग्लानि गर्भस्त्राव, श्वास, कास, प्रमेह, सुजाक वातपित्त, रक्तविकार, तथा क्षयादि में लाभ हो सकता

दुग्ध चिकित्सा करते समय उसके नियमों को कडाई के साथ पालन करना अत्यन्त आवश्यक है अन्यथा मनमानी करने से लाभ के बदले हानि हो सकती है। इस लिये दुग्ध चिकित्सा किसी अनुभवी दुग्ध-चिकित्सक की निगरानी में ही होनी चाहिये।दूध को शुद्ध बर्तन में लेकर उसे चम्मच से थोडा थोडा मुंह में डालकर और भोजन के ग्रास की तरह चबाकर तब निगलना चाहिये ताकि मुंह का राल भलीभांति उस में मिल सके। कल्प में दूध को पचाने के लिये औषधियों का व्यवहार भूल से भी नहीं करना चाहिये। _कल्प के दिनों में दूध कल्प के असर से दबे रोग उभडते हैं और उभड़कर सदा के लिये चले जाते हैं।

अतः उनसे डरने के बजाय खुश होना चाहिये फिर भी यदि दूध अरूचि या वायु उत्पन्न करे और गुड़-गुड़ बोले तो

प्रातः काल दूध का सेवन करने से एक घंटा पहले दो चम्मच ठंडे जल में एक या आधे कागजी नींबू का रस निचोड़कर पी जायें गुड़गुड़ाहट अधिक होने पर जब जब दूध पीवे उसमें पांच या सात बूंद नींबू का रस मिलाकर पीवे लाभ होगा। यदि इन उपचारों से पेट की गुड़गुड़ाहट शान्त न हो तो दूध का पीना एक दम बन्द करके दो तीन दिनों का उपवास कर डाले और तत्पश्चात् दूध का पीना पुनः आरम्भ कर यही उपचार कल्प के दिनों में कब्ज, दस्त, ज्वर, मितली तथा सिर दर्द आदि उपद्रवों के होने पर भी करें और तकलीफ अधिक बढ़ने पर किसी अनुभवी

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भोजन रस लें। चौथे दिन सबेरे दूध और दोन दूध लें। पांच वे दिन सबेरे फल औ

दो वक्त केवल फल और

सफल और दूध तथा शाम

भोजन में दूध फल के बजाय कोई

आठवे दिन सबर दूध और एक या दा फुल्का रोटी

कल और दूध, दोपहर के भोजन

ले सकते हैं। छठवें, सातवें और आठवें फल और शाम को सब्जी के साथ एक नवें दिन से सबेरे नाश्ते में फल और टा में सब्जी, रोटी ताजे मीठे फल और मेवे टा आरम्भ कर दें और कुछ दिनों तक यह के को समझदारी के साथ साधारण भोजन क

मेवे दूध के साथ लेना क यह क्रम चलावें । बाद

पण भोजन करना आरम्भ कर दें।Natural life Healthier Life

 

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