अलविदा 2020 / सियासी गलियारे में एक नई चर्चा छेड़ गया साल 20 20

Good Bye 2020 in Hindi

जहां आज भारत और पूरी दुनिया में पुराने साल को अलविदा कहा जाता है और नए साल का स्वागत किया जाता है। नए साल में प्रवेश करने पर एक-दूसरे को शुभकामनाएं दी जाती हैं। यह साल 2020 पत्रकारों और किसानों के लिए बहुत मुश्किलें लेकर आया । इसमें एक प्रमुख पंजाबी अखबार के पत्रकार को मोहाली थाने में लाया गया और कोरोना संकट के कारण सरकार की नाकामीउ को जाहर करनै पर  24/05/2020 को  सरकार द्वारा अपमानित किया गया।अखबार “पहरेदार” के एक पत्रकार जसवीर सिंह के खिलाफ पंजाब के एक मंत्री के ज्योतिषीय रुझानों पर एक रिपोर्ट लिखने के लिए मामला दर्ज किया गया था और उसे भी बुरी तरह पीटा गया ।सिधवा के एक पत्रकार सुखविंदर सोही और उनकी मां को ग्रामीणों ने नकली शराब के साथ 200 लोगों की मौत के लिए रिपोर्टिंग करने पर हाल ही में पीटा था, और प्रशासन ने कार्रवाई करने के लिए अनिच्छा दिखाई।

पंजाब जर्नलिस्ट प्रेस क्लब रजिस्टर के अध्यक्ष मंजीत मान जो एक ईमानदार और  साहसी  पत्रकार है ,को भी हत्या के मामले में संदेह के आधार पर बुक किया गया था, जो काला संघियन में हुई थी और लगातार तीन महीनों के संघर्ष के बाद उन्हें बरी कर दिया गया । टीवी पत्रकार चंदनप्रीत कौर साय 24/12/2020  कांग्रेस के सांसद जसबीर डिम्पा नै (खडूर साहिब )दुर्व्यवहार किया था। बाद में उन्हें जंतर मंतर स्ट्रीट पुलिस नेपर्चा दर्ज किया

यहां यह साल पत्रकारों के लिए अच्छा नहीं रहा है, साथ ही साथ देश के किसानों के लिए भी, एक आंदोलन जो इतनी ठंड और करो ना क्राइसिस के चलते हुए किसान अपनी जान तली पर लेकर  सड़कों पर चल रहा है, लाखों किसानों, बुजुर्ग बच्चों, माताओं, और बहनें इस नए कृषि कानून 2020 को वापस पाने की कोशिश कर रही हैं। वे दिल्ली की सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं और साथ ही, पंजाब और हरियाणा में टोल प्लाज़ा मुक्त कर दिए गए हैं। वे शांतिपूर्वक विरोध भी कर रहे हैं। अंबानी और अदानी के व्यापारिक आउटलेट पर किसानों के धरने भी चल रहे हैं। अब तक किसी भी यात्री ट्रेन को जंडियाला रेलवे लाइन से गुजरने की अनुमति नहीं दी गई.

किसानों की हर कोशिश है के सरकार उनकी बातों मुश्किलों को समझें

किसानों की हर कोशिश है कि किसी तरह सरकार को उनकी शिकायतों को समझें और उसका हल निकाले । आखिर हाल तो सरकार ने ही निकालना है। किसानों के लिए कितना मुश्किल समय है। एक ओर, वे पंजाब और हरियाणा में विरोध कर रहे हैं। वहां उन मै कईऊ कै बच्चे देश की रक्षा के लिए देश की सीमाओं पर खड़े हैं। बुजुर्ग बहनें, माताएँ और बच्चे सर्दी की परवाह किए बिना दो डिग्री तापमान में भी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। 

आखिर क्या है किसान आंदोलन

आखिर क्या है किसान आंदोलन  27 सितंबर को मोदी सरकार द्वारा इंडिया में नया एग्री बिल पास किया गया जिसके बारे में किसानों का कहना है कि इस बिल से किसानों को कम और कारपोरेट घरानों को ज्यादा फायदा होने वाला है इसलिए हम चाहते हैं कि बीलों को सरकार वापस ले किसानों का आंदोलन सतंबर से लेकर नवंबर तक पंजाब के अंदर ही चलता रहा वह 2 महीनों तक रेलवे लाइनों पर बैठे रहे कीसान और उन्होंने कोई भी ट्रेन वहां पर चलने नहीं दी उसके बाद मुख्यमंत्री पंजाब के किहने पर के पंजाब में कोला खत्म हो रहा है और बिजली की समस्या आ सकती है इसलिए आप रेलवे लाइनों से उठ जाए तो

किसान वहां से उठा और दिल्ली की ओर चल पड़ा रास्ते में चलते चलते अपने ही देश में अपने ही लोगों द्वारा चुनी हुई सरकार ने उन पर दिल्ली जाने से रोकने के लिए लाठी चारज  बी कीआ ,वाटर केनन का इीसतैमाल बी किया गया  आंसू गैस और जनता के पैसे से बनी हुई सड़कों में खेद कर खडै बना दीये गए  के किसान वहां पर गिर जाएं और आगे दिल्ली तक ना पहॅंच सके लेकिन यह किसान सभी पहाड़ जैसी बाधाओं को पार करते हुए वहां से दिल्ली में पहुंच गए और आज तक इतनी सर्दी में अपनी मांगों को लेकर वहीं पर ही डटे हुए हैं जबकि 1 महीने के अंदर 52 मौतें भी हो चुकी है, लेकिन फिर भी अभी तक सरकार  नरम नहीं हुई है किसान यह 2020 साल कभी नहीं भूल सकेंगे यह आर्टिकल लिखने तक अभी तक किसान डटे हुए हैं और किसान इतनी मुश्किल में फसा के उसको कोविड-19  की मार भी भूल गई

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दुनिया में क्या संदेश जा रहा है

जहां किसान खुद संघर्ष कर रहे हैं रहे हैं, वही 2020 के इस आंदोलन ने दुनिया को एक संदेश दिया है कि जिस देश में चार से पांच लाख लोग लगातार तीन महीनों से संघर्ष कर रहे हैं, अगर उनकी बात नहीं सुनी गई, तो किसी एक व्यक्ति का क्या हश्र होता होगा , ऐसै देश मै ? यही कारण है कि भारत में सभी की अपनी-अपनी यूनियन है .

पूरी दुनिया में इसका असर

अगर यही किसान आंदोलन लंबा चलता है तो इसका असर पूरी दुनिया में हो सकता है वेब मीडिया की वजह से क्योंकि अमेरिका का किसान भारत के किसान से 200 गुना ज्यादा गरीब है क्योंकि वह 200 गुना सब्सिडी ले रहा है. According to the American Farm Bureau, debt in the farm sector is projected to increase by 4 percent to a record $434 billion this year and farm bankruptcies have continued to rise across the country.

पंजाब प्रेस क्लब के पदाधिकारीओ की मीटॅग नकोदर में ह्रई और किसान आंदोलन को पूर्ण समर्थन देने का प्रस्ताव पारित कीआ गिया

 

सियासी गलियारे में एक नई चर्चा छेड़ गया साल 20 20

राजनीतिक दलों को सभी दलों के मंत्रियों, राज्यसभा सदस्यों और विशेष रूप से देश के मुख्यमंत्रियों को इस कानून के बारे में पहले से जानकारी थी   5 जनवरी को पारित किया गया था, लेकिन 2 8 सितंबर को 8 वें महीने के बाद जब इसे संसद और राजसभा में पारित किया गया  तो इसकी चर्चा शुरू हुई ,तब भी सत्ता पक्ष यह कहेगा कि हमने किसानों को जागृत किया है ताकि 40 सदस्यीय समिति और हर किसान की कठिनाइयों से आगे निकल सकें.

पूर्व IAS अधिकारी द्वारा दी गई एक और नई जानकारी यह है कि एक किसान की परिभाषा को “वन कंट्री वन पॉलिसी” के तहत बदल दिया गया है, जो कि पूर्व IAS अधिकारी के अनुसार,नए कृषि कानून को वापस कराने की मांग उचित है। दूसरी ओर, अकालियों ने यह भी कहा कि हमने किसानों के लिए अपने पुराने मंत्री कार्यकाल को तोड़ा है और किसानों के लिए एक संघीय ढांचे की बात की है। AAP खनन और मादक पदार्थों की तस्करी जैसे पुराने मुद्दों पर बात करेगी। लेकिन अब किसान समुदाय पर भारत के बहुत सारे लोगों की निगाहें लगी है, अगर वे सत्ता में आते हैं, तो 82% किसान समुदाय को बेहतर भविष्य दे सकते हैं और औरै को भी,

लोगों का वेब मीडिया (web Media ) और सोशल मीडिया ( Social media ) पर ज्यादा भरोसा रहा

यह वर्ष 2020 भी पत्रकारों के लिए एक सबक होगा क्योंकि देश भर के किसान आंदोलन में शामिल लोग भारतीय राष्ट्रीय मीडिया पर बिल्कुल भी निर्भर नहीं हैं। प्रसिद्ध पत्रकार रवीश ने इसका नाम गेदी मीडिया रखा है। उन्होंने किसानों को एक आतंकवादी, एक नक्सली बताया

इस दौरान आंदोलनकारियों ने सोशल मीडिया और वेब मीडिया पर बहुत अधिक भरोसा किया जिसने उनके आंदोलन को बहुत गति दी और आंदोलनकारियों की सच्ची तस्वीर दुनिया के सामने पेश की जा सकी। क्योंकि वे सोचते हैं कि गोधी मीडिया, वे अपनी वर्तमान पार्टियों से जुड़े हैं और वे केवल अपने प्रियजनों की रिपोर्ट करते हैं जबकि वे जनता के सामने सही तस्वीर पेश नहीं करते हैं।

गोदी मीडिया के उदाहरण

कुछ दिनों पहले 15/12/2020 के में मैंने एक बड़े अखबार में एक खबर पढ़ी, पंजाब में इको टूरिस्ट प्लेस हरि के पट्टन के विकास कार्य को पूरा कर लिया गया है: और इसे पर्यावरणविदों के लिए खोल दिया गया है, जबकि काम  20/03/2017 में ही पूरा किया गया था, इसलिए मैंने इसके बारे में फिर से खबर प्रकाशित की, जिसे मैं पूरी जानकारी के साथ लिंक दे रहा हूं , Eco Tourism in India ,Punjab wetland in Punjab, Good news for Bird watchers.. 

इसकी वजह से मैंने कई लोगों के कई कष्टप्रद फोन कॉल प्राप्त किए हैं फिर भी मैंने अपनी तरफ से सही जानकारी देने की भरपूर कोशिश की है ,जो मैंने पहले ही ऊपर उल्लेख किया है कि सभी पत्रकार समान नहीं हैं, लेकिन फिर भी बड़ी संख्या में  मीडिया की साख गिरी है जो पत्रकारिता के अस्तित्व के लिए एक खतरनाक चेतावनी है ,जो लगभग पंजाब प्रेस क्लब प्रधान मंजीत मान और सचिव रविंदर वर्मा पूरे वर्ष के दौरान प्रिंसिपल रवि शर्मा, संरक्षक एस, जे, एस, संधू, डॉ, जगतार, हरजीत सिंह और सचिव डॉ। तरलोचन सिंह , और क्लबों के कई जिला अध्यक्षों साल भर पत्रकारों और आम जनता के साथ हुआ अन्याय लड़ते देखे गए। । मुझे उम्मीद है कि यह नया साल जिसमें लोग पत्रकारिता में विश्वास खो चुके थे, आम जनता कह रही थी कि ये पत्रकार सरकारें या उनके नेता जो चाहें वै हो प्रकाशित करतें है। मैं कामना करता हूं इस वर्ष पत्रकारिता में इस गिरावट को अपने साथ ले जाएं। नया साल 2021 सभी के लिए अच्छा हो  और देश के किसानों को उनका हक मिल जॉऐ और हमारा देश तरक्की करें.सब का जीवन मंगलमय हो.

मुख्य संपादक डॉ। तेजी,

Read in English ⇒ Good BY 2020 !!!!!

ਪੰਜਾਬੀ ਵਿਚ ਪੜਣ ਲਈ ਕਲੀਕ ਕਰੋ ⇒ਅਲਵੀਦਾ 2020 !!!!!! 

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